मिल्खा सिंह का जीवन परिचय – Milkha Singh Biography in Hindi

मिल्खा सिंह ” फ्लाइंग सिख “आपने नाम तोह ज़रूर सुना होएगा। मिल्खा सिंह ने अपने लाजवाब दौड़ से देश ही नहीं दुनिया में भी काफी नाम कमाया।हाल ही में उनके ऊपर “भाग मिल्खा भाग “नाम से एक मूवी भी बनी,जिसने काफी लोकप्रियता और काफी कमाई भी की। उन्हें फ्लाइंग सिख का ख़िताब पाकिस्तान में ही मिला था ,जो भारतीय युवाओ को काफी प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने देश और विदेश में काफी लोगो को ट्रेनिंग भी दी थी। उनसे जुड़े कुछ रोचक बातें जानते है।

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मिल्खा सिंह का जीवन परिचय – Milkha Singh Biography in Hindi

पूरा नाम :मिल्खा सिंह 
 
पत्नी का नाम :निर्मल सैनी 
 बेटे का नाम :जीव मिल्खा सिंह
जन्म :20 नवंबर 1929
मृत्यु :18 जून 2021   

बहोत कम लोग जानते होंगे की मिल्खा सिंह का जन्म 20 नवंबर 1929 को पाकिस्तान के गोविंदपुरा में हुआ था। इनकी शुरुआती ज़िन्दगी में काफी कठिनाईया आयी ,भारत -पाकिस्तान विभाजन के वक़्त इन्होने अपने माता पिता को खो दिया था । उस वक़्त मिल्खा सिंह भारत में उस ट्रैन से आये थे जो पाकिस्तान का बॉर्डर पार करके शरणार्थियों को भारत लाई थी.

  • गौरतलब है की मिल्खा सिंह केवल 17 साल के थे ,जब वह 1947 में भारत आये थे।
  • पहले वह भारत के दिल्ली शहर में अपने शादी शुदा बहन के साथ कुछ दिन तक रहे थे।

भारत पाक विभाजन ने उनके दिमाग पर बुरा असर दाल दिया था ,क्योकि वह इस विभाजन से अपने माता पिता और रिश्तेदारों को खो दिए थे। बताया जाता है की स्कूल के दिनों में मिल्खा सिंह 10 किलो मीटर दौड़ कर स्कूल जाते थे ,और वापस अपने घर भी दौड़ कर ही आते थे। बाद में अपने भाई (मलखान )के कहने पर उन्होंने सेना में भर्ती होने के फैसला लिया ,इससे उनकी दौड़ में और ज़्यादा निखार आ गया । वह 1953 में सेना में भर्ती हुए थे। सेना में भर्ती होने वक़्त वह क्रॉस कंट्री रेस में छठे पायदान पर आये। आर्मी में रहकर ही उन्होंने दौड़ में काफी सुधार लाया। मिल्खा सिंह कहते है की काफी लोग उस वक़्त सेना में ऐसे भी थे जो यह भी नहीं जानते थे की ओलिंपिक क्या होता हैं। आर्मी में रहकर उन्होंने 400 मीटर की रेस के लिए काफी मेहनत की,यही से मिल्खा सिंह “फ्लाइंग सिख “का नया सफर जारी हुआ।

कभी दिल्ली रेलवे स्टेशन के बाहर जूते पोलिश करते थे

जी हां बिलकुल सही सुना आपने, मिल्खा सिंह कभी दिल्ली रेलवे स्टेशन के बाहर जूते पोलिश किया करते थे ,दरअसल मिल्खा जब पाकिस्तान से भारत में आये थे,तोह उनके पास पैसे कमाने का साधन नहीं था लिहाज़ा वह दिल्ली रेलवे स्टेशन के बाहर जूते पोलिश करने में लग गए और उन्होंने कई बार ट्रैन से सामान चुराकर अपना गुज़ारा किया ,इस दौरान वह जेल भी गए बाद में उनकी बहन ने अपने गहने बेचकर उन्हें छुड़ाया था।

मिल्खा सिंह Record : Milkha Singh Record in hindi

मिल्खा सिंह सेना में भर्ती होने के बाद से ही काफी अलग धावक बन गए और उन्होंने काफी रिकॉर्ड भी बनाये और पुराने रिकॉर्ड भी ब्रेक किये। उन्होंने भारत और एशिया समेत कई रिकॉर्ड बनाये और देश विदेश में भारत का नाम काफी रोशन किया। उन्होंने 200 मीटर ,400 मीटर में काफी रिकॉर्ड बनाये ,और भारत के सफलतम धावक बने।यही नहीं उनका 400 मीटर का विश्व कीर्तिमान रिकॉर्ड काफी वक़्त तक उनके नाम रहा.उनके बनाये हुए कुछ रिकॉर्ड ये है.

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मिल्खा सिंह का 400मीटर और 200 मीटर दौड़ में रिकॉर्ड (Milkha Singh 200 m, 400m record in hindi)

मेलबोर्न ओलिंपिक

साल 1956 में उन्होंने मेलबोर्न ओलिंपिक में 200 मीटर और 400 मीटर रेस में भारत का प्रतिनिधित्व किया।लेकिन अन्तराष्ट्रीय स्तर में कम अनुभव होने के कारण इस ओलिंपिक में वह कुछ कमाल नहीं कर सके। उस ओलिंपिक में उनकी मुलाकात चार्ल्स जेंकिंस से हुई जो मेलबोर्न ओलिंपिक के 400 मीटर दौड़ के विजेता थे। इस मुलाकात ने काफी कुछ बदल दिया ,चार्ल्स जेंकिंस ने न सिर्फ उन्हें प्रेरित किया बल्कि नए ट्रेनिंग सिस्टम से भी उनको रूबरू करवाया। इसके बाद मिल्खा सिंह ने जैसे रिकॉर्ड की झड़ी लगा दी।

रोम ओलंपिक

साल 1960 रोम ओलंपिक में एक बार फिर से मिल्खा सिंह भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए दिखे ,यही नहीं मिल्खा सिंह 400 मीटर दौड़ में 40 सालो का रिकॉर्ड तोड़ दिया ,लेकिन एक बार फिरसे मिल्खा सिंह मैडल (पदक )से दूर रहे ,वह उस ओलिंपिक में 4 (चौथे )स्थान पे रहे। इस प्रदर्शन से वह काफी नर्वस हो गए थे ,बताया जाता है की मिल्खा सिंह ने दौड़ से सन्यास लेने तक का मन बना लिया था। लेकिन दिग्गज एथलीट द्वारा समझाने के बाद वह एक बार फिरसे से मैदान में उतरे।

1960 रोम ओलंपिक में मिल्खा सिंह

साल 1998 में मिल्खा सिंह द्धारा रोम ओलंपिक में बनाए रिकॉर्ड को धावक परमजीत सिंह ने तोड़ा

मिल्खा सिंह 4 स्थान पे

एशियाई गेम्स
1958 के टोक्यो में एशियाई खेलो में 200 मीटर और 400 मीटर दौड़ में गोल्ड (स्वर्ण )पदक हासिल किया। इसी साल उन्हें एशियाई खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए सेना में जूनियर कमीशंड ऑफिसर के तौर पर प्रमोशन देकर सम्मानित हुए। यही नहीं उन्हें पंजाब के शिक्षा विभाग के खेल निदेशक के पद पर नियुक्त किया गया ,इस पद पर मिल्खा सिंह साल 1998 को रिटायर हुए।

  • साल 1962 को जकार्ता में 400 मीटर दौड़ में गोल्ड (स्वर्ण )पदक और 400 मीटर रिले दौड़ में भी स्वर्ण पदक हासिल किया।

नेशनल गेम्स
साल 1958 में कटक में आयोजित राष्ट्रीय खेल में मिल्खा सिंह ने 200 मीटर और 400 मीटर प्रतियोगिता में राष्ट्रीय कीर्तिमान बनाया। 200 मीटर और 400 मीटर दौड़ में मिल्खा सिंह ने स्वर्ण पदक हासिल किया।
साल 1964 कोलकाता में आयोजित राष्ट्रीय खेल में उन्होंने 400 मीटर दौड़ में दूसरा स्थान हासिल किया। पहले स्थान में माखन सिंह रहे थे। अपने एक इंटरव्यू में मिल्खा सिंह ने माना भी था की उन्हें दौड़ में सबसे ज़्यादा डर अगर किसी से लगता है तोह वह माखन सिंह ही है।

कॉमन वेल्थ गेम्स
साल 1958 में ब्रिटैन ,कार्डिफ में हुए कामनवेल्थ गेम्स में गोल्ड (स्वर्ण )मैडल जीता। यही नहीं वह एक मात्र भारतीय है ,जिन्होंने एकल दौड़ में भारत की ऒर से कॉमन वेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता है।

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फ्लाइंग सिख “बनने की कहानी” (Story behind “Flying Sikh” in hindi )


बहोत कम लोग जानते है की मिल्खा सिंह को “फ्लाइंग सिख “का ख़िताब पाकिस्तान ने ही दिया था। बात असल में साल 1958 की है जब मिल्खा सिंह एक धावक के रूप में अपने चरम पे थे और भारत सहित कई देशो में काफी पॉपुलर हो गए थे । लेकिन साल 1960 में मिल्खा सिंह ने पाकिस्तान में इंटरनेशनल एथलीट कॉम्पिटेशन में भाग लेने से मना कर दिया। इसके पीछे कारन यह था की मिल्खा सिंह भारत -पाकिस्तान के बटवारे के वक़्त अपने रिश्तेदारों को छूट जाने को नहीं भुला सके थे। इसलिए वह भाग नहीं लेना चाहते थे, लेकिन उस वक़्त के प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल के अनुरोध करने के बाद उन्होंने इसमें शामिल होने का फैसला लिया। इस एथलीट कम्पटीशन में उन्होंने पाकिस्तान के मशहूर धावक अब्दुल ख़ालिक़ को हराकर इतिहास में अपना नाम दर्ज करवाया था।इसी जीत के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति मार्शल अय्यूब ने मिल्खा सिंह को ‘फ्लाइंग सिख “के ख़िताब से नवाज़ा था।

वह जब लाहौर में भारत-पाक प्रतियोगिता में दौड़ रहें थे तब एशिया के प्रतिष्ठित धावक पाकिस्तान के अब्दुल खालिक को 200 मीटर की दौड़ में पछाड़ते हुए तेज़ी से आगे निकल गए | उस वक़्त लोगों ने कहा “मिल्खा सिंह दौड़ नहीं रहें थे बल्कि उड़ रहें थे” बस उनका नाम तब से फ्लाइंगसिख पड़ गया | 

https://youtu.be/4qungMpRtfc
फ्लाइंग सिख “बनने की कहानी”
जब पूरे भारत ने छुट्टी मनाई जीत पे

बात दरअसल 1958 की है जब मिल्खा सिंह पुरे विश्वे में एक बेहतरीन धवक के रूप में पहचान बनाये जाने लगे ,उन्होंने कार्डिफ राष्ट्र मंडल खेलो में विश्व रिकॉर्ड होल्डर मैलकम स्पेस को 440 गज़ की दौड़ में हरा कर स्वर्ण पदक जीता ,उस वक़्त इंग्लैंड की महारानी ने उन्हें खुद स्वर्ण पदक उनके गले में पहनाया ,भारत के झंडे को ऊपर जाते देख मिल्खा काफी भावुक हो गए थे ,तभी फ़ौरन उन्होंने देखा की वि आई पी एन्क्लोज़र से एक महिला साड़ी पहने आती है ,तभी भारतीय टीम के प्रमुख अश्विनी कुमार ने उनका परिचय करवाया ,वह ब्रिटैन में भारत की उच्चायुक्त विजय लछमी पंडित थी ,वह उन्हें मुबारक बाद देने के बाद कहती है की पंडित जवाहर लाल नेहरू ने उन्हें उपहार में कुछ मांगने को कहा है। उस वक़्त मिल्खा सिंह को समझ नहीं आया सो उन्होंने पुरे भारत में छुट्टी करने की मांग की ,जिस दिन वह भारत पहुंचे तोह देखते है पंडित जवाहर लाल नेहरू अपना वादा पूरा करते है और पुरे भारत में छुट्टी घोषित करते है।

.1 सेकंड का रहा ज़िन्दगी भर मलाल (Rome Olympic 1960)

मिल्खा सिंह ने अनेक बार दौड़ में भारत का नाम रोशन किया ,और 80 अन्तराष्ट्रीय सम्प्रदाओं में हिस्सा लिया और केवल 3 में उन्हें हार मिली ,लेकिन एक हार की सबसे ज़्यादा जो चर्चा की जाती है वह है उनकी रोम ओलिम्पिक मिली हार का। दरअसल वह फ़ाइनल में सबसे आगे थे लेकिन उन्होंने यह महसूस किया की बाकि खिलाड़ि उनसे पीछे है ,सो उन्होंने अपनी गति को थोड़ा कम किया और पीछे मुड़के देखा ,परन्तु बाकि खिलाड़ियों ने अपनी गति ज़्यादा बढ़ाते हुए उनसे आगे निकल गए ,लेकिन फिर उन्होंने ज़ोर लगाया पर कोई फायदा नहीं हुआ खिलाडी उनसे काफी लीड ले चुके थे। उन्हें आखिर में चौथे स्थान से ही संतोष होना पड़ा और वह कोई भी पदक नहीं जीत सके। मिल्खा सिंह यह बताया भी की वह इस हार के बाद काफी सदमे में थे ,उन्हें यह गम ज़िन्दगी भर सताता रहा। उन्होंने एक बातचीत में यह बात सामने रखी की दरअसल उन्हें पीछे देखने की आदत सी लग गयी थी ,उन्होंने पीछे मुड़कर देखना एशियाई गेम्स ,कामनवेल्थ गेम्स और कई राष्ट्रीय खेल में कर चुके थे। लेकिन ओलिपिक में ऐसी गलती करना काफी महंगा साबित हुआ.

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रोम ओलिंपिक की पूरी कहानी.

मिल्खा पूरी कहानी बताते हुए आगे कहते है की रोम ओलिपिक से पहले लोग उनका जादू देख चुके थे और सभी उनसे यही उम्मीद कर रहे थे की अगर कोई मैडल लाएगा तोह वह मिल्खा ही होंगे । यही नहीं रोम में भारतीय टीम के कोच वेस रील को पूरा भरोसा था की मिल्खा ज़रूर मैडल लाएगा और उन्हें यह भी भरोसा था की हो सकता है वह मैडल स्वर्ण ही हो ,इसके पीछे कारण मिल्खा सिंह का काफी अच्छा परफॉरमेंस रहा था। रोम में मिल्खा सिंह पांचवी हीट में दूसरे स्थान पे रहे थे, और सेमीफइनल में भी वह दूसरे स्थान पे थे। उनका कहना था की पूरा स्टेडियम उन्हें काफी सपोर्ट करता था ,और लोगो का कहना था की मिल्खा एक साधु है क्योकि इससे पहले उन्होंने किसी भी सरदार को ऐसे दौड़ लगते हुए नहीं देखा था।

  • आमतौर पे ओलिंपिक सेमीफइनल के बाद फाइनल की दौड़ एक दिन बाद होती है लेकिन रोम में ऐसा नहीं हुआ फाइनल दौड़ 2 दिन बाद हुई थी।

लेकिन इससे उनपर काफी दबाओ आ गया था क्योकि वह काफी सोच में डूब गए थे। वह बताते है की वह काफी नर्वस थे,और अपने कमरे में काफी तेज़ तेज़ चलने लगते थे। उन्होंने अपनी आत्मकथा द रेस ऑफ़ माय लाइफ में यह बताया भी है। “अचानक उनके दरवाज़े को किसी ने खटखटाया और बाहर देखा तोह उनके मैनेजर उमराव सिंह थे ,वह उन्हें एक लम्बी वॉक पे ले गए ,वह उन्हें काफी प्रेरणा स्त्रोत बाते कर रहे थे ,जैसे सिख गुरुओ की बाते बताने लगे ताकि फाइनल मुकाबले के लिए उनका ध्यान बट सके। अगले दिन फाइनल में “कार्ल कफमन” को पहली लाइन दी गयी ,और अमेरिका के “ओटिस डेविस” दूसरी लाइन में थे।,लेकिन दुर्भाग्य पूर्ण मिल्खा सिंह को 5 वि लाइन मिलती है। उनके बगल में एक जर्मन एथलीट था जो 6 धावक में सबसे कमज़ोर था, मिल्खा बताते है की इससे उन्हें रेस को जज करने में काफी प्रॉब्लम हुई क्योकि वह उस धावक को काफी बार हरा चुके थे ।

  • मिल्खा बताते है की वह करीब 250 मीटर तक दौड़ को लीड कर रहे थे तभी फ़ौरन उनके दिल में यह ख्याल आता है की मिल्खा आप बहोत तेज़ दौड़ रहे है हो सकता है की आप इस दौड़ को पूरा भी नहीं कर पाए फिर उन्होंने अपनी गति कम की ,लेकिन अंत के 100 मीटर में वह देखते है की जो 3 ,4 लोग उनसे पीछे थे उनसे आगे निकल जाते है।

फिर मिल्खा सिंह बताते है की उन्होंने काफी उन एथलीट को पछाड़ने की कोशिश की लेकिन ओलिंपिक में अगर कोई 3 ,4 गज़ आगे बढ़ जाए तोह उसे कवर करना काफी मुश्किल हो जाता है। ये गलती मिल्खा अपनी ज़िन्दगी भर नहीं भूल पाए क्योकि उस वक़्त मिल्खा ही नहीं पुरे भारत को एक ज़ोर का झटका लगा था । यह एक बहोत ही नज़दीकी रेस थी ,क्योकि इसमें पिछले ओलिंपिक का रिकॉर्ड तोड़ दिया था। पहले चार स्थानों का फैसला फोटो फिनिश से हुआ था। डेविस ,कफमन ,स्पेस और मिल्खा सिंह ने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे।

  • डेविस 44. 9 सेकंड से पहले ,कफमन का समय 44.9 रहा उन्हें फोटो फिनिश से दूसरा स्थान मिला, स्पेस कासमय 45. 5 निकला और मिल्खा सिंह 45.6 का समय निकाल के 4 थे स्थान पे रहे थे ,लेकिन यह समय का ओलिंपिक बेस्ट 45. 9 से बेहतर था। इस तरह केवल 0.1 सेकंड से मिल्खा रोम ओलिंपिक में 4 थे स्थान पे रहे और कोई भी मैडल नहीं पा सके.जहां वह सेकेंड के दसवें हिस्से से पदक से चूक गए थे.इस तरह वह सेंकण्ड के दसवे हिस्से से पदक चूक गए थे।
रोम ओलिंपिक की पूरी कहानी.

Milkha Singh movie (मिल्खा सिंह के ऊपर बनी फिल्म)

मिल्खा सिंह पे बनायीं गयी फिल्म “भाग मिल्खा भाग12 जुलाई 2013 को रिलीज़ हुई ,इस फिल्म ने काफी अच्छे तरह से मिल्खा सिंह के जीवन के बारे में बताया है। फरहान खान इस फिल्म के अभिनेता है.इस फिल्म के निर्देशक राकेश ओमप्रकाश महरा है ,यह फिल्म उस वक़्त काफी सक्सेसफुल रही ,यह फिल्म उस वक़्त बॉलीवुड की 2013 की 6 वि पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा कमाई करना वाली फिल्म बनी। इस फिल्म में पूरी लाइफ स्टोरी मिल्खा सिंह की दिखाई गयी है।मिल्खा सिंह की बचपन में कैसे अपने परिवार से बिछड़ जाते है यह भी इस फिल्म में दिखाया गया है। यह फिल्म ने नेशनल और फिल्म फेयर जैसे बड़े अवार्ड्स जीते थे।इस फिल्म को 2014 में बेस्ट एंटरटेनमेंट फिल्म का पुरस्कार भी मिला था।

रिलीज़ डेट :12 जुलाई 2013 
 
लागत :41 करोड़ रुपये
कुल कमाई :210 करोड़ रुपये 
अवार्ड : बेस्ट फिल्म का फिल्म फेयर अवार्ड  ,स्क्रीन अवार्ड,आईफा ,स्टार गिल्ड अवार्ड,ज़ी सिने अवार्ड 

Milkha Singh family (मिल्खा सिंह की फॅमिली)

मिल्खा सिंह की पत्नी का नाम निर्मल सैनी है ,जो भारतीय वूमेंस वॉलीबॉल टीम की पूर्व कप्तान रह चुकी है। इनकी मुलाकात साल 1955 में सेलोन में हुई। फिर दोनों ने साल 1962 में विवाह कर लिया। दोनों को 3 बेटिया और 1 लड़का नसीब हुआ। मशहूर गोल्फर जीव मिल्खा सिंह इनके ही बेटे है। दोनों ने साल 1999 में एक और बेटे को गोद लिया जिनका नाम बिक्रम सिंह है। लेकिन उनकी टाइगर हिल की लड़ाई में मत्यु हो गयी थी।13 जून 2021 को उनकी पत्नी (निर्मल सैनी)का भी देहांत हो गया है

 पत्नी का नाम :निर्मल सैनी 
 बेटा:जीव मिल्खा सिंह 

मिल्खा सिंह के बारे में कुछ रोचक तथ्य (Facts of Milkha Singh in hindi)

  • बहोत कम लोग जानते है की मिल्खा सिंह का जन्म गोविंदपुरा ,पाकिस्तान में हुआ था।
  • भारत-पाकिस्तान का बटवारा होने के बाद मिल्खा सिंह भारत आ गए थे। उन्होंने इस बटवारे के बाद अपने माँ बाप को वही खो दिया था। मिल्खा जब भारत आये तोह उनकी उम्र केवल 17 साल थी।
  • वह दिल्ली में पहले छोटे मोठे अपराध करके जेल भी जा चुके है।
  • वह 1951 तक सेना में भर्ती होने के 2 प्रयास नाकाम ही चुके थे।
  • सेना में भर्ती नहीं होने के बाद वह एक रबर फैक्ट्री में 15 रुपये /माह की तनख्वाह में जॉब करने लगे ,लेकिन वह ज़्यादा देर तक नहीं टिक सके उन्हें हीट स्ट्रोक के कारण 2 महीने तक बेड पे रहना पढ़ा ।
  • 1952 में अपने भाई की मदद से वह सेना में भर्ती हुए,उनकी पोस्टिंग श्री नगर में हुई।
  • 1953 में वह क्रॉस कंट्री रेस में 6 वे पायदान में आये। यही से उनकी नयी ज़िन्दगी की शुरुआत हुई।
  • उन्होंने अपनी पहली 400 मीटर की रेस को 63 सेकंड में पूरी की। यह रेस ब्रिगटे मीट में हुईं थीं ,इसमें मिल्खा 4 थे पायदान में आये थे.मिल्खा सिंह को शुरुआत में यह भी पता नहीं था की 400 मीटर कितना होता है ,लेकिन बाद में पुराने एथलिट गुरुदेव सिंह ने उन्हें बताया की 400 मीटर एक राउंड ट्रैक का होता है।
  • मिल्खा सिंह 400 मीटर रेस कि तैयारी में जुट गए ,लेकिन उन्हें काफी कभी कभी नाक से खून बहने लग जाता था ।
  • मिल्खा अपने पहले ओलिंपिक (मेलबोर्न ओलिंपिक 1956 )में कुछ खास नहीं कर पाए थे।
  • मिल्खा सिंह 1958 के कॉमन वेल्थ गेम्स में पहले स्थान में आये थे ,इसका क्रेडिट उन्होंने अमेरिका के मशहूर कोच डॉक्टर आर्थर होवार्ड को दिया।
  • साल 1958 को उन्हें पद्म श्री अवार्ड से नवाज़ा गया।
  • 1960 रोम ओलिम्पिक को शायद ही कौन भारतीय भूल सकता है जब मिल्खा 0.1 सेकंड से चौथे स्थान पे आये थे।लेकिन उनकी टाइमिंग 38 वर्ष तक राष्ट्रीय रिकॉर्ड रही ,साल 1998 को उनका रिकॉर्ड परमजीत सिंह ने तोड़ दिया ।
  • मिल्खा सिंह ने अपने करियर में 80 रेस में से 77 में जीत हासिल की ।
  • उनका सपना अभी भी अधूरा है इसमें वह कहता है की कोई भारतीय रेस ट्रैक में ओलिंपिक मैडल जीते।
  • मिल्खा सिंह भारत आने के बाद गुज़ारा करने के लिए दिल्ली स्टेशन के बाहर जूते पोलिश किया करते थे।
  • साल 1960 में वह पाकिस्तान के अब्दुल ख़ालिक़ को हराकर फ्लाइंग सिख का ख़िताब हासिल किया था,यह ख़िताब उन्हें पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री जनरल अय्यूब खान ने दी।
  • वह रोम ओलिम्पिक (1960 ) को मात्र 0.1 सेकंड से पदक से चूक गए थे। इसका गम उन्हें ज़िन्दगी भर रहा।
  • साल 1960 में मिल्खा सिंह को पंजाब के मुख्य मंत्री प्रताप सिंह ने आर्मी छोड़कर डिप्टी डायरेक्टर के तौर पर ,डिपार्टमेंट ऑफ़ स्पोर्ट्स ,पंजाब ज्वाइन करने को कहा।
  • 1960 में मिल्खा सिंह अपनी होने वाली वाइफ निर्मल सैनी से पटियाला में मिले।
  • 1964 में मिल्खा सिंह ने समर ओलिंपिक टोक्यो में भी पार्टिसिपेट किया।
  • साल 2001 में मिल्खा सिंह को अर्जुन अवार्ड से नवाज़ा गया ,लेकिन उन्होंने इसे लेने से इंकार कर दिया।
  • मिल्खा सिंह ने सारे मेडल्स देश को समर्पित कर दिए ,पहले उनके मेडल्स जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम,नयी दिल्ली में रखे हुए थे बाद में पटिआला के म्यूजियम में रख दिए गए।
  • साल 2012 में मिल्खा सिंह ने अपने एडिडास के जूते को डोनेट करने का फैसला लिया ,यह जूता उन्होंने रोम ओलिंपिक में पहना था। इस जूते की राशि उन्होंने चैरिटी (दान ) में दे दी।
  • साल 2013 में मिल्खा सिंह और उनकी बेटी सोनिया सांवल्का ने उनके ऊपर(मिल्खा सिंह ) आधरित किताब “द रेस ऑफ़ माय लाइफ “को लिखा।
  • मिल्खा सिंह इस किताब की राइट्स राकेश ओम प्रकाश महरा को दी जो बाद में फिल्म भाग मिल्खा भाग को निर्देशित किये । इस फिल्म में फरहान अख्तर और सोनम कपूर लीड रोल में दिखे

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